गुरु के मार्गदर्शन के अभाव में सुखानुभूति तो दूर, शांतिमय जीवन की कल्पना भी अधूरी

खंडवा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सिंधी कॉलोनी स्थित सिंधी सेवा मंडली धर्मशाला में हरेमाधव सत्संग परमार्थ समिति कटनी शाखा खंडवा द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में कृपापात्र महेश फतवानी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा जीवन मुक्त सतगुरु के प्रति नतमस्तक होने, उनकी महानता का स्मरण करने तथा गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को ज्ञानवान, प्रकाशवान और शक्तिवान बनाने के लिए प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा की पुनर्स्थापना की आवश्यकता है। गुरु के मार्गदर्शन के अभाव में सुखानुभूति तो दूर, शांतिमय जीवन की कल्पना भी अधूरी है।
आयोजन सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी के आशीर्वाद एवं हरिराया सतगुरु सांई ईश्वरशाह साहिब जी की पावन कृपादृष्टि में श्रद्धा और विश्वास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. अनीश अरझरे उपस्थित रहे।
महेश फतवानी ने गुरु वाणी का वाचन करते हुए कहा कि पूर्ण सतगुरु के बिना व्यक्ति चाहे कितने भी जप, तप और कर्मकांड कर ले, लेकिन आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती। सच्ची मुक्ति सतगुरु नाम मंत्र के सिमरन और ध्यान से प्राप्त हो सकती है। गुरुमंत्र का नियमित एवं निरंतर अभ्यास ही मुक्ति का आधार है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति सतगुरु की शरण, ओट, प्रेम, चरण-पूजन और चरण-आरती से जुड़ता है, तो उसकी आत्मा भी काल की सीमा से ऊपर उठकर सतगुरु के प्रकाश में लीन हो जाती है। सतगुरु असीम आनंद और जीवनमुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं तथा इन आध्यात्मिक निधियों को किसी के वर्ण-वर्ग के आधार पर नहीं, बल्कि शुद्ध और भोले भाव से अर्जित करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सिंधी धर्मशाला में विशाल केक काटकर गुरु पूर्णिमा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। सत्संग एवं आरती के बाद पधारी हजारों संगत ने हरेमाधव ब्रह्मभोज भंडारा प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर नरेंद्र फतवानी, भरत धामेजा, सुरेश मलानी, कुमार फतवानी, श्रीचंद तोलानी, निर्मल मंगवानी, रवि, जितू रामलानी, जयराम मेघवानी, गोल्डी फतवानी सहित मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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