न्यायालय नकारात्मक साक्ष्य देने के लिए किसी व्यक्ति को बाध्य नही कर सकती:-चेक बाउंस मामले में महत्व पूर्ण फैसला..!

*न्यायालय नकारात्मक साक्ष्य देने के लिए किसी व्यक्ति को बाध्य नही कर सकती:-चेक बाउंस मामले में महत्व पूर्ण फैसला!*
खंडवा:-जिला न्यायालय खंडवा के न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री जगत प्रताप अटल साहब ने चेक बाउंस मामले में महत्व पूर्ण फैसला देते हुए आरोपी यूसुफ कादरी पिता हाजी भूरे खां को *395000₹ का प्रतिकर अधिरोपित करते हुए 6 माह के सश्रम कारावास से दंडित किया है।*
प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी मनोहर संतवाणी से आरोपी यूसुफ कादरी पिता हाजी भूरे खां कादरी ने अपने पारिवारिक कार्यो के लिए तीन लाख रुपये उधार प्राप्त किये।उक्त ऋण की अदायगी हेतु आरोपी ने तीन लाख का एक चेक परिवादी मनोहर लाल को दिया।मनोहर लाल ने उक्त चेक को बैंक में रुपया प्राप्त करने है प्रस्तुत किया।बैंक में वह चेक बाउंस हो गया।मनोहरलाल ने यूसुफ को एक नोटिस दिया।और भुगतान प्राप्त ना होने पर मुकदमा लगाया।जहां पूर्ण विचारण के पश्चात कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया।
कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाते हुए अपने महत्व पूर्ण फैसले में यह उल्लेखित किया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के अनुसार न्यायालय नकारात्मक साक्ष्य देने के लिए किसी व्यक्ति को बाध्य नही कर सकती है।आरोपी द्वारा यह प्रतिरक्षा नही ली गई कि परिवादी मनोहरलाल की आरोपी यूसुफ को तीन लाख रुपये देने की छमता नही है।बल्कि यूसुफ ने मनोहर लाल से 25 हजार रुपये उधार लेने और उसे वापिस लौटाने की प्रतिरक्षा ली है।जिससे यह स्पष्ट होता है कि मनोहरलाल राशि देने में सक्षम है।और उसके द्वारा प्रथक से उसकी छमता को साबित ना करने से आरोपी यूसुफ पर अंतरित भार उन्मोचित नही हो जाता है।
*प्रकरण में मनोहर लाल की और से अशोक केलदे अधिवक्ता ने पैरवी की..
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