पंधाना के ग्राम धनोरा में आस्था का अद्भुत केंद्र: स्वयंभू चामुंडा देवी मंदिर में हर वर्ष बढ़ती है प्रतिमा, 1500 श्रद्धालुओं का होता है भंडारा
खंडवा। पंधाना तहसील के ग्राम धनोरा में गंगराड़े समाज की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित प्राचीन चामुंडा देवी मंदिर आस्था और चमत्कार का अनोखा केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार यहां माता चामुंडा देवी स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थीं और समय के साथ उनकी प्रतिमा निरंतर आकार में बढ़ती जा रही है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पूर्व माता की लगभग एक फीट ऊंची प्रतिमा जमीन से प्रकट हुई थी, जो हर वर्ष धीरे-धीरे बढ़ते हुए आज विशाल स्वरूप धारण करती जा रही है। इसी विशेषता के कारण यह मंदिर दूर-दूर तक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
सालभर में 8 से 10 भंडारे
मंदिर में प्रतिवर्ष 8 से 10 भंडारों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रत्येक भंडारे में लगभग 1200 से 1500 श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। भंडारे में हलवा, चना दाल की सब्जी, रोटी, दाल-चावल का भोग लगाकर प्रसादी वितरित की जाती है।
सामूहिक सेवा की अनूठी परंपरा
भंडारे की सबसे विशेष बात यह है कि गांव की सभी महिलाएं अपने-अपने घरों से बेलन और तख्ता लेकर आती हैं और सामूहिक रूप से रोटियां बनाती हैं। करीब 1500 लोगों का भोजन गांव के महिला-पुरुष मिलकर स्वयं तैयार करते हैं।
गांव में जब भी भंडारा होता है, उस दिन कोई भी ग्रामीण खेतों में काम करने नहीं जाता—सभी लोग माता की सेवा और भंडारे की व्यवस्था में जुट जाते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।
आज हुआ विशेष आयोजन
आज माता चामुंडा देवी मंदिर में ग्राम धनोरा निवासी झवर जी, दिनेश गुजर एवं ममता गुजर द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
धनोरा का यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सेवा भावना का भी जीवंत उदाहरण है।
Read Next









