खंडवा के खालवा में लोकायुक्त का बड़ा ट्रैप: 2 लाख 5 हजार की मांग, 5 हजार लेते ही धराई अफसर
खंडवा। खालवा — अजय प्रिंस मेहता की रिपोर्ट
महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश पर लोकायुक्त इकाई इंदौर ने गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को खालवा क्षेत्र में ट्रैप कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा पर्यवेक्षक अजिला मोहे (55) को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
कौन है शिकायतकर्ता?
शिकायतकर्ता सलिता पालवी (27), पति अजेश सिलाले, निवासी ग्राम मोजवारी, तहसील खालवा, जिला खंडवा हैं। वे अक्टूबर 2025 से आंगनवाड़ी केंद्र-1 मोजवारी में सहायिका के पद पर कार्यरत हैं।
ग्राम मोजवारी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र-3 में कार्यकर्ता का पद रिक्त होने पर, पात्रता पूरी होने के कारण सलिता पालवी ने नियमानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग, खालवा में आवेदन प्रस्तुत किया था।
क्यों मांगी गई रिश्वत?
आरोप है कि महिला बाल विकास परियोजना खालवा के सेक्टर सावली में पदस्थ संविदा पर्यवेक्षक अजिला मोहे, निवासी ग्राम मलगांव पोस्ट खेडी, तहसील खालवा ने शिकायतकर्ता से—
पूर्व में सहायिका पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर ₹5,000,
तथा कार्यकर्ता पद पर आंगनवाड़ी केंद्र-3 मोजवारी में पदस्थापना के लिए ₹2,00,000
की मांग की। इस प्रकार कुल ₹2,05,000 की रिश्वत मांगी गई।
कैसे बिछाया गया जाल?
सलिता पालवी ने इस संबंध में शिकायत राजेश सहाय, पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), इंदौर से की। शिकायत का सत्यापन किया गया, जो सही पाया गया। इसके बाद 26 फरवरी 2026 को ट्रैप दल का गठन किया गया।
लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी अजिला मोहे को शिकायतकर्ता से ₹5,000 की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
किन धाराओं में कार्रवाई?
आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
ट्रैप दल में शामिल अधिकारी
इस कार्रवाई में कार्यवाहक निरीक्षक प्रतिभा तोमर, कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास, आरक्षक विजय कुमार, आरक्षक शिवप्रकाश पाराशर, आरक्षक कमलेश परिहार, आरक्षक मनीष माथुर एवं महिला आरक्षक 4650 अनिता प्रजापति शामिल रहे।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से खालवा क्षेत्र के महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि नियुक्ति और पदस्थापना के नाम पर रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
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