खंडवा : 🔥 4 साल बाद भ्रष्टाचार पर वार: रिश्वतखोर पटवारी को 3 साल की सश्रम जेल, 25 हजार का जुर्माना

खंडवा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई। माननीय विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, खंडवा की अदालत ने विताराम पटेल (उम्र 50 वर्ष), पद पटवारी, निवासी ग्राम बोरगांव खुर्द को रिश्वत लेने के मामले में 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता राकेशसिंह मोर्य, निवासी ग्राम जामली कला, जिला खंडवा की जमीन उनके पिता के नाम पर थी। पिता द्वारा दोनों बेटों के नाम बंटवारा और नामांतरण कराने के लिए लोकसेवा केंद्र पंधाना में आवेदन दिया गया था।
कुछ ही दिनों बाद हल्का नंबर 50 के पटवारी चिंताराम पटेल (प्रकरण में आरोपी) घर पहुंचे और बंटवारा-नामांतरण व पावती बनाने के नाम पर 10,000 रुपये की मांग की।
आरोप है कि पटवारी पहले ही 2,500 रुपये ले चुका था और शेष 7,500 रुपये की मांग कर रहा था। उसने साफ कह दिया था कि “पैसे नहीं दोगे तो काम नहीं होगा।”
कैसे हुआ ट्रैप?
रिश्वत देने से इनकार करते हुए फरियादी ने 20 सितंबर 2021 को लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक द्वारा निरीक्षक सुनील उईके को जांच सौंपी गई।
थाना विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त में अपराध क्रमांक 176/21 धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
27 सितंबर 2021 को लोकायुक्त टीम ने ग्राम जामली कला, कोहदड़ रोड स्थित श्रद्धा ट्रेडर्स के पास आरोपी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
अदालत का फैसला
संपूर्ण विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर मामला विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) खंडवा में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 25,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
लोकायुक्त की ओर से प्रकरण का संचालन सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी विनोद कुमार पटेल ने किया।
साक्षियों को न्यायालय में प्रस्तुत कराने में पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश सहाय के निर्देशन में आर. पवन पटोरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश है—
रिश्वत लेने वालों को देर से सही, लेकिन सजा जरूर मिलती है।
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