चेक बाउंस पड़ा भारी: न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री अरविंद सिंह का सख्त फैसला, 6 माह की जेल और ₹3.79 लाख प्रतिकर का आदेश”*
खंडवा। न्यायालयीन आदेशों का सम्मान एवं वित्तीय लेन-देन में ईमानदारी बनाए रखने का संदेश देते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री अरविंद सिंह ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के एक प्रकरण में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 6 माह के साधारण कारावास तथा परिवादी को ₹3,79,900 प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया है। आदेशानुसार प्रतिकर राशि में मूल चेक राशि ₹2,50,000 तथा ब्याज सम्मिलित है। प्रतिकर राशि का भुगतान न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 3 माह का कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि चेक केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि विश्वास और आर्थिक लेन-देन का महत्वपूर्ण माध्यम है। चेक जारी करने के बाद भुगतान से बचना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे समाज में आर्थिक विश्वास भी प्रभावित होता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि धारा 138 का उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र न्याय एवं उचित प्रतिकर दिलाना है।
यह निर्णय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि चेक जारी करने से पूर्व बैंक खाते में पर्याप्त राशि सुनिश्चित करें तथा वित्तीय दायित्वों का समय पर निर्वहन करें। अन्यथा कानून के तहत कारावास, आर्थिक दंड एवं न्यायालयीन कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है।
Read Next
खंडवा
खंडवा 