शासकीय भवनों पर रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना हेतु विद्युत क्रय अनुबंध किया गया*

खण्डवा 8 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत-2047” के संकल्प तथा मध्यप्रदेश शासन की हरित ऊर्जा नीति के अनुरूप कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिले के विभिन्न शासकीय संस्थानों में रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हेतु विद्युत क्रय अनुबंध अर्थात पावर पर्चेस एग्रीमेन्ट सम्पन्न किए गए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रतिनिधि, सम्बंधित विभागों के जिला अधिकारी एवं चयनित “रेस्को” एजेंसी के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में शासकीय विद्यालयों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानोंएवं अन्य चयनित शासकीय परिसरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने हेतु विद्युत क्रय अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इन परियोजनाओं से स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, सरकारी संस्थानों के विद्युत व्यय में दीर्घकालिक बचत होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तथा पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने कहा कि भारत आज विश्व के अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा राष्ट्रों में शामिल है और सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में विश्व के शीर्ष देशों में गिना जाता है। पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों को समय-पूर्व प्राप्त करते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के नेतृत्वकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित की है। “विकसित भारत-2047” के दृष्टिकोण के अंतर्गत ऐसी विकेंद्रीकृत, जिला-स्तरीय परियोजनाएँ राष्ट्रीय ऊर्जा आत्मनिर्भरता और नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में ठोस कदम हैं।
कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने कहा कि सौर ऊर्जा ऊर्जा आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा एवं सतत विकास की मजबूत आधारशिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “विकसित भारत-2047” के लक्ष्य की प्राप्ति में ऐसी परियोजनाएँ भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। उन्होंने सभी विभागों को परियोजनाओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा “रेस्को” मॉडल के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे ये संयंत्र बिना किसी प्रारंभिक पूंजीगत व्यय के शासकीय संस्थानों को स्वच्छ, विश्वसनीय एवं किफायती विद्युत उपलब्ध कराएंगे। इससे ऊर्जा लागत में बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी, हरित विकास को बढ़ावा तथा भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को नई गति मिलेगी।
*(फोटो संलग्न)*
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