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ओंकारेश्वर में बड़ा खुलासा! युवक की डूबने से मौत, 108 नहीं पहुंची तो कपड़े में बांधकर ले गए शव

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवती अमावस्या के महापर्व पर जहां एक ओर आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ा, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्थाओं और लापरवाही के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना दिया।

ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन और मां नर्मदा में पुण्य स्नान के लिए एक लाख से अधिक श्रद्धालु तीर्थ नगरी पहुंचे थे। इसी दौरान नगर घाट क्षेत्र में महाराष्ट्र के अमरावती से आए एक युवक की नर्मदा नदी में डूबने से मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी गई, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। हालात ऐसे बने कि मृत युवक के शव को कपड़े में बांधकर लोगों को अस्पताल तक लेकर जाना पड़ा। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को झकझोर देने वाला था।

सबसे दुखद बात यह रही कि घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग मृत युवक को देखने के लिए जमा हो गए। लोगों का कहना है कि ओंकारेश्वर में जहां जीवित श्रद्धालु व्यवस्थाओं के अभाव से परेशान दिखाई दिए, वहीं मृत्यु के बाद भी एक व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को लेकर सवाल खड़े होते रहे। मृतक का शव लोगों की भीड़ के बीच चर्चा और कौतूहल का विषय बना रहा।

इधर, नर्मदा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी पोल खुलती दिखाई दी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु खतरनाक चट्टानों और जोखिम भरे स्थानों पर स्नान करते नजर आए। कई जगह फिसलन और गहराई होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन संभावित हादसों को रोकने के लिए पर्याप्त सख्ती करता दिखाई नहीं दिया और कई स्थानों पर केवल दर्शक की भूमिका में नजर आया।

सोमवती अमावस्या पर उमड़ी भारी भीड़ का असर यातायात व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दिया। नए बस स्टैंड से लेकर फोरलेन मार्ग तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु घंटों जाम में फंसे रहे और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर फैला यह लंबा जाम प्रशासनिक तैयारियों और ट्रैफिक प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को उजागर करता नजर आया।

जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा पर्व को लेकर बेहतर व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर दिखाई दी तस्वीरें उन दावों से मेल नहीं खाती दिखीं। स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब अमरावती के युवक की डूबने से हुई मौत के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि इस पूरे मामले की समीक्षा की जाए और भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा सुविधाओं के लिए ठोस और प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि आस्था के इस महापर्व पर किसी को अव्यवस्थाओं और लापरवाही का शिकार न होना पड़े।

Anoop Kumar Khurana

Publisher and Editor Anti corruption and crime update & ACACU DIZITEL

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