खंडवा : 3900 करोड़ की भारतमाला परियोजना पर बड़ा सवाल! ट्रैफिक शुरू होने से पहले धंसा नया पुल, ग्रामीणों ने खोली पोल
मध्यप्रदेश में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खरगोन जिले के बासवां गांव के पास खिरकिया नदी पर बना एक नया पुल ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही धंस गया है।
बताया जा रहा है कि यह पुल करीब दो महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ था और अभी इसे वाहनों के लिए खोला भी नहीं गया था। लेकिन पुल की स्लैब का एक हिस्सा धंस गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों के अनुसार पुल की छत का हिस्सा टूटकर नीचे धंस गया और वहां बड़ा गड्ढा बन गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि पुल में इस्तेमाल किए गए सरिए और कंक्रीट की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों ने मौके के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस पुल पर अभी तक ट्रैफिक शुरू नहीं हुआ, वह आखिर धंसा कैसे? लोगों का कहना है कि अगर यह पुल चालू हो चुका होता और उस समय कोई भारी वाहन वहां से गुजर रहा होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल धंसने के बाद निर्माण एजेंसी ने खामियां छिपाने की कोशिश की। धंसे हुए हिस्से पर पहले बारदान यानी बोरियां बिछाई गईं, फिर उसके ऊपर मिट्टी डाली गई। आसपास पत्थरों का ढेर लगाकर बैरिकेड्स लगा दिए गए, ताकि कोई उस हिस्से तक न पहुंच सके।
यह पुल भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे 203 किलोमीटर लंबे इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे का हिस्सा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 3900 करोड़ रुपए बताई जा रही है। वहीं धनगांव से बलवाड़ा तक करीब 40 किलोमीटर के हिस्से की लागत एक हजार एक करोड़ रुपए से अधिक है।
जानकारी के अनुसार इस हिस्से का मुख्य ठेका जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को मिला है, जबकि निर्माण कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से अन्य कंपनियों द्वारा कराया जा रहा है। नर्मदा नदी पर बनने वाले बड़े पुल का काम मंगलम बिल्डकॉन को दिया गया है, जबकि सड़क और अन्य पुलों का निर्माण नागपुर की केदारेश्वर कंपनी कर रही है।
मामले में जब निर्माण एजेंसी और प्रोजेक्ट प्रबंधन से सवाल किए गए तो शुरुआत में जिम्मेदार अधिकारियों ने घटना की जानकारी होने से इनकार कर दिया। हालांकि खबर सामने आने के बाद कंपनी की ओर से सफाई दी गई कि पुल की छत गुणवत्ता खराब होने से नहीं धंसी, बल्कि एक ओवरलोड वाहन पुलिया पर चढ़ गया था और खराब होकर वहीं फंस गया था।
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रूद्रा हजांगे के मुताबिक वाहन को हटाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था, जिसके दौरान पुलिया के एक हिस्से को तोड़ा गया। उनका कहना है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम जारी है।
हालांकि स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के बीच अब भी कई सवाल बने हुए हैं। आखिर यदि पुल अभी शुरू ही नहीं हुआ था, तो उस पर ओवरलोड वाहन कैसे पहुंचा? और यदि रेस्क्यू के दौरान हिस्सा तोड़ा गया था, तो उसे छिपाने के लिए मिट्टी और बारदान डालने की जरूरत क्यों पड़ी?
फिलहाल यह मामला भारतमाला परियोजना के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर बहस खड़ी कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराता है या नहीं।
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