खंडवा: कांग्रेस ने मंडी शुल्क 1% से 1.5% बढ़ाने का किया विरोध, बढ़ी दर वापस लेने की मांग, सौंपा ज्ञापन
खंडवा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के निर्णय का खंडवा में विरोध शुरू हो गया है। मंडी शुल्क में 50 प्रतिशत की वृद्धि पर चिंता जताते हुए संबंधित पक्षों ने शासन से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मंडी शुल्क बढ़ने से प्रदेश के किसानों, मंडी व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। साथ ही यह भी बताया गया कि राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में मंडी शुल्क की दरें अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में शुल्क अधिक होने से मंडी व्यापार पड़ोसी राज्यों की ओर स्थानांतरित होने की आशंका है, जिससे स्थानीय व्यापार और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मंडी शुल्क बढ़ने का सीधा असर अनाज, तिलहन और अन्य कृषि उपज की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे व्यापार की लागत बढ़ेगी और इसका अप्रत्यक्ष भार किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने में भी कठिनाई आ सकती है।
ज्ञापन के माध्यम से शासन से मांग की गई है कि मंडी शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत की वृद्धि को जनहित, किसान हित और व्यापारी हित में तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा पूर्व की 1 प्रतिशत या उससे कम शुल्क व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए।
ज्ञापन में उम्मीद जताई गई है कि प्रदेश सरकार किसानों, व्यापारियों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सकारात्मक और न्यायसंगत निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
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