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ये है भगवान के टेलर, तेयार करते है डिजाइनर कपडे ।

कपड़े सिलते समय पंडितो की तरह, नियमों का करना पड़ता है पालन 
 
मूर्तियों के पोशाक सिलवाने के लिए लगती है भक्तों की भीड़
भगवान के टेलर के पास नवरात्रि प्रारंभ होते ही माता की चुनरी बनवाने लग रही भक्तों की भीड़ 
ड्रेस डिजायनर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में जो तस्वीर उभरती है, वो फिल्मी हीरो-हीरोइन की होती है। सेलेब्रिटिस के ड्रेस डिजायनर के बारे में तो बहुत सुन रखा होगा, लेकिन भगवान के ड्रेस डिजायनर के बारे में कभी नहीं सुना होगा। जी हां ये सच है, खंडवा में एक टेलर ऐसा भी है जो सिर्फ भगवानों के कपड़े डिजायन करता है। मंदिर हो या घर में विराजित भगवान, श्रद्धालु उनके लिए कपड़े बनवाने भगवान के टेलर के पास ही पहुंचते है।
खंडवा के कहारवाड़ी निवासी भरत कुवादे बांबे बाजार आशा मार्केट में टेलर की दुकान चलाते है। भरत कुवादे की पहचान अब भगवान के टेलर के रूप में बन गई है। जिले के अधिकतर मंदिरों में इनके द्वारा तैयार किए गए कपड़े ही भगवान को पहनाए जाते है। भरत ने अधिकतर मंदिरों में स्वयं जाकर भगवान की प्रतिमा का नाप ले रखा है। सिर्फ मंदिर का नाम बताना होता है और ये भगवान की ड्रेस बनाकर तैयार कर देते है। जन्माष्टमी हो हनुमान जयंती हो या गणेश उत्सव या नवरात्र, सुबह से लेकर शाम तक भी लोग यहां पर भगवान के कपड़े बनवाने के लिए आते रहते है। भरत बताते है कि वर्तमान में नवरात्रि पर माता रानी की चुनरी और माता मंदिर की ड्रेस बनाने का कार्य किया जा रहा है।
15 वर्षों से कर रहे हैं कार्य
भरत भगवानों की पोशाक सिलने का काम पिछले करीब 15 वर्षों से करते आ रहे हैं। उन्होंने भगवान के कपड़े सिलने का काम अपने पिता से सीखा था। जिसके बाद उन्होंने भगवान की पोशाक तैयार करने के लिए बांबे बाजार के पास दुकान खोली। लोग इन्हें भगवान का टेलर भी कह कर पुकारते हैं। इनकी दुकान में इस समय चमकीले और लैस लगे कपड़ों की भरमार है, जिससे कि वह भगवान की पोशाक तैयार करते हैं। इनकी पत्नी और बच्चे भी मदद के लिए दुकान में आते रहते है।
आसपास के जिले से भी आने लगे लोग
ग्राहक मित्र हेमंत मोराने ने बताया कि कुछ सालों में भरत कुवादे कि ख्याति कुछ इस कदर फैली कि न सिर्फ खंडवा बल्कि आसपास के जिलों हरदा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, इंदौर से भी लोग उनकी दुकान पर भगवान की पोशाकें तैयार कराने के लिए आते हैं। इनके पास लगभग सभी मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं के नाप मौजूद हैं और जिस मंदिर का नाप नहीं होता है जाकर ले आते हैं। गर्मियों में सिल्क और रेशमी कपड़े से भगवान की पोशाक बनाते हैं तो सर्दियों में मखमली कपड़ों से भगवान की पोशाक तैयार करते हैं।
भगवान की प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाना होता है तो लोग सीधे आशा मार्केट भागते हैं। घण्टाघर के पास के भगवान के कपड़े सिलने वाले भरत कुवादे के पास शहर के सभी मंदिराें के प्रतिमाओ के नाप हैं। इनको भगवान का दर्जी कहा जाता है। भगवान के ड्रेस डिजाइन के नाम से खंडवा में प्रसिद्ध है। इन्हें सिर्फ मंदिर का नाम बताना है, कपड़े तैयार मिलेंगे। दुकान पर भरत अकेले कारीगर है, जो जी जान लगाकर पूरे भक्ति भाव से कार्य करते है। इन्हे पंडितों की तरह कई नियमों का पालन करना पड़ता है।
वही, यह सभी वस्त्र तैयार करने से पहले साफ-सफाई का भी बड़ा महत्व है. कपड़ो की पवित्रता बनी रहे है उसके लिए कई बातों का भी ख्याल विशेष तौर पर रखा जाता है। पूरी दुकान रंग- बिरंगे चमकीले कपड़े और सितारों से चमक से भरी रहती है। नवरात्रि में माता की चुनरी बनावाने हेतु पहले से ऑडर बुक हो गए है। भरत कुवादे के पास एक कापी में सभी मंदिरों के भगवान की प्रतिमाओं के नाप नोट हैं। किसी को भी भगवान को वस्त्र भेंट करने हैं तो मंदिर और भगवान का नाम लिखवा देते हैं। 16 साल से यह काम कर रहे भरत बताते हैं कि उन्होंने पिता से यह कार्य सीखा था। पहले लेडीज वर्क करते थे, लेकिन बाद में इसी कार्य में रम गए। पूरी दुकान रंग- बिरंगे चमकीले कपड़े और सितारों से चमक रही होती हैं। इनको  नौ दुर्गा  पर माता मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों की प्रतिमाओं का पूरा ब्यौरा है।
इनके पास इस वक्त करीब 150 वस्त्रों के आर्डर हैं जिनकी सिलाई के साथ कपड़ा लेकर भगवान के वस्त्र वह तैयार करते हैं। पिछले सालों में इनके काम में तेजी आई है। पहले मात्र दस से बीस आर्डर आते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। नाप लिखी डायरी को कई साल हो गए। जिन मंदिरों में नाप नहीं है उनके जाकर ले आते हैं। गर्मियों में सिल्क जरी के कपड़े प्रतिमाओं के लिए सिलते हैं। जबकि जाड़ों में यह मखमली कपड़ों के सिलते हैं।

Anoop Kumar Khurana

Publisher and Editor Anti corruption and crime update & ACACU DIZITEL

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