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CID कांस्टेबल से सीधे सब-इंस्पेक्टर का सफर: 9 साल की तपस्या के बाद खाकी के ‘सितारे’ बने पंकज, SC पुलिस वर्ग में मध्य प्रदेश टॉपर*

कहते हैं कि मुश्किलें केवल उनका रास्ता रोकती हैं जिनके इरादों में जान नहीं होती, लेकिन जब इरादे फौलादी हों तो किस्मत को भी घुटने टेकने पड़ते हैं। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है खंडवा के रहने वाले पंकज चक्रवर्ती ने। हाल ही में घोषित हुए मध्य प्रदेश सब-इंस्पेक्टर (MP SI) परीक्षा के परिणामों में पंकज ने न केवल सफलता का परचम लहराया, बल्कि SC पुलिस वर्ग श्रेणी में पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम रैंक (Rank 1) हासिल कर इतिहास रच दिया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश पुलिस की सबसे प्रतिष्ठित इंटेलिजेंस विंग—अपराध अनुसंधान विभाग (CID) में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत पंकज की यह यात्रा आंसुओं, संघर्षों और अटूट हौसले से भरी है।

*12 वर्ष की उम्र में सिर से उठा पिता का साया, स्कूल ने दिया सहारा*
पंकज का बचपन खंडवा की ‘दूध तलाई चौपाटी’ की गलियों में बीता, जहाँ उनके पिता परिवार के भरण-पोषण के लिए चाइनीज फूड का ठेला लगाते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब पंकज महज 12 वर्ष के थे, तब असमय पिता की मृत्यु हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और आर्थिक संकट गहरा गया। ऐसे कठिन समय में पंकज के मामा और बड़े पापा ढाल बनकर खड़े हुए, जिन्होंने उनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी संभाली। पंकज की प्रारंभिक शिक्षा ‘सरस्वती विद्या मंदिर, खंडवा’ से हुई। पंकज की मेधा और पारिवारिक स्थिति को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने भी संवेदनशीलता दिखाई और कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई में फीस में बड़ी छूट देकर इस होनहार छात्र का हौसला टूटने नहीं दिया।
*आर्थिक तंगी के कारण बीच में छूटी इंजीनियरिंग, पहले प्रयास में बने CID कांस्टेबल*
स्कूल के बाद पंकज ने आगे की राह चुनी, लेकिन गरीबी ने फिर रास्ता रोका। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि उन्हें अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ना पड़ा। यह किसी भी छात्र के लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन पंकज ने हार मानने के बजाय अपना रुख प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर कर लिया। उनकी एकाग्रता का आलम यह था कि अपने पहले ही प्रयास में वे मध्य प्रदेश पुलिस की सीआईडी (CID) जैसी विशिष्ट शाखा में कांस्टेबल के पद पर चुन लिए गए।
*9 साल का लंबा इंतजार, ड्यूटी के साथ जारी रखा तप*
नौकरी मिलने के बाद पंकज सुरक्षित बैठ सकते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे। उन्होंने ड्यूटी की व्यस्तता के बीच भी अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की। पुलिस विभाग की 24 घंटे की कठिन और अनिश्चित ड्यूटी के साथ पढ़ाई को जारी रखना आसान नहीं था। दिन में खाकी का फर्ज और रात को किताबों से नाता—यह सिलसिला लगातार 9 साल तक चलता रहा। कई बार भर्तियां लेट हुईं, कई बार रुकावटें आईं, लेकिन पंकज का लक्ष्य स्थिर था। इस लंबी तपस्या का फल तब मिला जब परिणाम आया और पंकज का नाम सीधे मध्य प्रदेश की टॉपर सूची में सबसे ऊपर चमका।
*”अब जरूरतमंदों की मदद करना ही मेरा एकमात्र उद्देश्य है”*
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर भावुक होते हुए पंकज चक्रवर्ती कहते हैं, “मैंने बचपन से अभाव और तंगहाली को बहुत करीब से देखा है। मैं जानता हूँ कि जब साधन न हों तो आगे बढ़ना कितना मुश्किल होता है। ईश्वर और परिवार के आशीर्वाद से आज मुझे जो खाकी का यह नया रूप (सब-इंस्पेक्टर का पद) मिला है, उसका उपयोग मैं समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए करूँगा। मेरा उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाकर समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाना है।”

Anoop Kumar Khurana

Publisher and Editor Anti corruption and crime update & ACACU DIZITEL

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