खंडवा: ‘जंगल है तो जीवन है’… कोरकू समाज उतरा सड़क पर, वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग
जंगल बचाने के लिए कोरकू समाज की सकारात्मक पहल, वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का किया समर्थन
खंडवा, 12 जुलाई। वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने और वन संरक्षण के समर्थन में खंडवा एवं बुरहानपुर जिले के कोरकू समाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कोरकू समाज के नागरिक और वन सुरक्षा समितियों के सदस्य शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने “जंगल है तो जीवन है” और “तीर गोफन खाएंगे, जंगल हम बचाएंगे” जैसे नारे लगाए तथा सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपा।
खालवा विकासखंड के ग्राम ताल्याधड़ निवासी धारासिंह ने कहा कि वन भूमि पर लगातार हुए अवैध अतिक्रमणों के कारण जंगलों का क्षेत्रफल घट रहा है, वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं और कोरकू समाज के पारंपरिक निस्तार अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में आदिवासी समाज, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने भिलायीखेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यह कार्रवाई वन संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, जल संरक्षण और आदिवासी समाज के दीर्घकालीन हित में है। समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बिना किसी दबाव के आगे भी लगातार जारी रखी जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि वन संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोग करने वाले ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि इससे वन संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
वनवासी मानक लाल ने कहा कि कोरकू समाज का अस्तित्व, संस्कृति, परंपराएं और आजीविका सदियों से जंगलों पर आधारित रही हैं। जंगल केवल भूमि नहीं, बल्कि समाज की पहचान, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हैं। उन्होंने बताया कि जलाऊ लकड़ी, महुआ, चिरौंजी, गोंद, तेंदूपत्ता, औषधीय वन उपज, पशुओं के लिए चारा तथा अन्य लघु वनोपज ग्रामीणों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसके अलावा वनों के संरक्षण से मिलने वाला काष्ठ लाभांश भी ग्रामीणों के आर्थिक हितों से जुड़ा है।
कोरकू समाज ने जिला प्रशासन से मांग की कि खंडवा एवं बुरहानपुर जिले की समस्त वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाए। साथ ही, भिलायीखेड़ा सहित अतिक्रमण मुक्त कराई गई वन भूमि पर दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए व्यापक पौधरोपण, नियमित गश्त, चौकी, ट्रेंच, वॉच टॉवर तथा अन्य स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएं।
समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी मांग की कि अतिक्रमण हटाने के दौरान वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक संरक्षण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, वन कर्मियों पर हमला करने, शासकीय कार्य में बाधा डालने तथा वन अपराधों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश स्तर पर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग भी की गई। समाज का कहना है कि वनों की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
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