खंडवा में यूरिया खाद का बड़ा घोटाला? 172 टन स्टॉक रिकॉर्ड में, गोदाम मिला खाली
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद विकासखंड में यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी और स्टॉक में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच के बाद छनेरा स्थित मेसर्स इनफिनिटी एग्रो के संचालक आयुष पांडे के खिलाफ हरसूद थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई को सहायक संचालक कृषि जितेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने दुकान का निरीक्षण किया। इस दौरान उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी गोरेलाल वास्कले सहित अन्य अधिकारियों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड, पीओएस मशीन और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान किया। जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
जांच के दौरान पाया गया कि पीओएस मशीन में विभिन्न कंपनियों की 3,828 बैग यानी 172.26 मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक में दर्ज था, जबकि गोदाम पूरी तरह खाली मिला और वहां एक भी यूरिया की बोरी मौजूद नहीं थी। वहीं मध्यप्रदेश शासन की ई-विकास (E-Token) प्रणाली में 4,318 बैग यानी 194.31 मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक दर्ज पाया गया। डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इस बड़े अंतर को विभाग ने गंभीर अनियमितता माना है।
केवल यूरिया ही नहीं, बल्कि कृष्णा फॉस्केम लिमिटेड की सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) खाद के स्टॉक में भी गड़बड़ी सामने आई। पीओएस मशीन में इसका स्टॉक शून्य दर्ज था, जबकि ई-विकास पोर्टल पर 27.90 मीट्रिक टन और गोदाम में 9 मीट्रिक टन एसएसपी खाद मौजूद मिली। विभाग के अनुसार पीओएस, ई-विकास पोर्टल और वास्तविक स्टॉक तीनों का रिकॉर्ड समान होना चाहिए था।
निरीक्षण के दौरान बिना O Form के उर्वरक का व्यापार करना, किसानों को बिक्री बिल जारी नहीं करना, स्टॉक रजिस्टर का संधारण नहीं करना, मूल्य सूची और स्टॉक बोर्ड प्रदर्शित नहीं करना, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना तथा पीओएस मशीन और ई-टोकन प्रणाली के अनुसार बिक्री दर्ज नहीं करना जैसी कई अनियमितताएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार स्टॉक में मिले अंतर को लेकर संचालक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर 11 जुलाई को कृषि विभाग ने हरसूद थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की धारा 4, 5, 8 और 35 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया।
फिलहाल हरसूद पुलिस कृषि विभाग की जांच रिपोर्ट, पीओएस रिकॉर्ड, ई-विकास पोर्टल के डेटा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामले की विस्तृत विवेचना कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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