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खंडवा: प्रेम प्रसंग में पति की हत्या का मामला: पत्नी और प्रेमी को आजीवन कारावास, खंडवा न्यायालय का बड़ा फैसला

खंडवा: मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के बहुचर्चित बोरगांव हत्याकांड में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री अनिल चौधरी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्रेम प्रसंग के चलते अपने ही पति की हत्या कराने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने आरोपी अख्तर अली पिता अकील अली, उम्र 25 वर्ष, निवासी जलगांव, जिला जलगांव (महाराष्ट्र) को धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता के तहत आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 61(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 332-ए भारतीय न्याय संहिता के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड तथा आयुध अधिनियम की धारा 25/27 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

वहीं सह-अभियुक्त शहनाज बी पति आमीन, उम्र 34 वर्ष, निवासी बोरगांव, जिला खंडवा को धारा 61(2) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी उप संचालक अभियोजन श्री त्रिलोकचंद्र बिल्लौरे ने की।

यह था पूरा घटनाक्रम

अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी मो. जाहिद खान, एडीपीओ के अनुसार, 24 मई 2025 को सुबह करीब 4:15 बजे पुलिस चौकी बोरगांव, थाना पंधाना में पदस्थ आरक्षक उमेरसिंह जाट को एक मुखबिर द्वारा फोन पर सूचना मिली कि बोरगांव में मस्जिद के पास रहने वाले आमीन को किसी अज्ञात व्यक्ति ने गोली मार दी है।

सूचना मिलते ही आरक्षक ने चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव को घटना से अवगत कराया। इसके बाद चौकी प्रभारी तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल को सुरक्षित कराया। इस बीच परिजन घायल आमीन को उपचार के लिए जिला अस्पताल खंडवा लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विभिन्न पहलुओं पर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान मृतक की पत्नी शहनाज बी और उसके प्रेमी अख्तर अली पर संदेह गहराया। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

पूछताछ में आरोपी अख्तर अली ने बताया कि उसका शहनाज बी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों ने मिलकर आमीन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी।

आरोपी के अनुसार, 23 मई 2025 की रात वह महाराष्ट्र से बोरगांव पहुंचा। करीब रात 2:30 बजे उसने अपनी मोटरसाइकिल गांव में शिवाजी प्रतिमा के पास खड़ी की और पैदल शहनाज के घर पहुंचा। उसने घर का दरवाजा कई बार खटखटाया, लेकिन शुरू में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उसने खिड़की से देखा कि शहनाज अपने पति आमीन के साथ सो रही थी।

कुछ देर बाद जब शहनाज बाथरूम जाने के लिए उठी, तब उसने दोबारा दरवाजा खटखटाया। शहनाज ने पहले खिड़की से बाहर देखा और अख्तर को पहचानने के बाद मुख्य दरवाजा खोल दिया।

अख्तर के अनुसार उसने शहनाज से पूछा कि अब क्या करना है। इस पर शहनाज ने कथित रूप से कहा कि पहले आसपास के घरों के दरवाजे बाहर से बंद कर दो, ताकि गोली चलने के बाद यदि शोर हो तो पड़ोसी तुरंत बाहर न निकल सकें और भागने का समय मिल जाए।

इसके बाद अख्तर ने शहनाज के घर के अतिरिक्त आसपास के सात से आठ मकानों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए। फिर वह दोबारा घर के अंदर पहुंचा।

उस समय आमीन बिस्तर पर बाईं करवट सो रहे थे और उनके पास उनका सबसे छोटा बेटा भी सो रहा था। शहनाज जाकर दोबारा आमीन के पास लेट गई। इसी दौरान अख्तर ने पिस्टल से आमीन के सिर पर गोली चला दी।

गोली चलने की आवाज सुनकर घर के दूसरे कमरे में मौजूद लोग जाग गए और शोर मचाने लगे। इसके बाद अख्तर तुरंत घर से बाहर निकला, घर का दरवाजा भी बाहर से बंद किया और वहां से भागकर अपनी मोटरसाइकिल तक पहुंचा।

आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह मोटरसाइकिल से महाराष्ट्र के चोपड़ा की ओर रवाना हो गया। रास्ते में पंधार नाले के पास उसने अपने मोबाइल फोन की सिम निकालकर तोड़ दी और फेंक दी। इसके बाद मोबाइल फोन तथा घटना के समय पहने हुए कपड़ों को एक प्लास्टिक की थैली में रखकर जंगल में पेड़ के नीचे छिपा दिया और अपने साथ लाए दूसरे कपड़े पहन लिए।

चोपड़ा पहुंचने के बाद आरोपी ने वारदात में प्रयुक्त पिस्टल और उसकी दो जिंदा गोलियां चोपड़ा-वराड रोड स्थित एक पुलिया के नीचे छिपा दीं।

पुलिस ने आरोपी के बयान, तकनीकी साक्ष्यों, बरामदगी, फॉरेंसिक रिपोर्ट तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी की और दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य और गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री अनिल चौधरी ने आरोपी अख्तर अली और शहनाज बी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास सहित विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।

यह फैसला प्रेम प्रसंग में रची गई सुनियोजित हत्या के मामले में खंडवा न्यायालय का एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

Anoop Kumar Khurana

Publisher and Editor Anti corruption and crime update & ACACU DIZITEL

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