खंडवा के ओंकारेश्वर में आयोजित हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम

*विश्व सिकल सेल दिवस:
*राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने की राज्य सरकार की सराहना, कहा- समय से पहले पूरा हो गया स्क्रीनिंग का लक्ष्य*– *खंडवा के ओंकारेश्वर में आयोजित हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम*
–*सीएम डॉ. मोहन बोले- दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही सरकार*
– *देश में 7 करोड़ और प्रदेश में सवा करोड़ लोगों की हो चुकी स्क्रीनिंग*
– *पीएम मोदी ने शुरू किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047*
भोपाल/खंडवा। ‘अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की मैं सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया।’ यह बात राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कही। राष्ट्रपति मुर्मु 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत आयोजित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय गान जन गण मन के साथ हुई। इस दौरान सिकल सेल एनीमिया पर केंद्रित लघु फिल्म और जागरूकता के लिए बनाए गए वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन- 2047 में उत्कृ्ष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जांच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिए जा चुके हैं। सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम की समुचित प्रतिक्रिया देने की दूरदर्शी सोच भी थी।
*मिशन में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन*
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया। इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, एनएचएम, डब्ल्यूएचओ और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किए हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आकलन सामने आया कि भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं, लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं, सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय पट्टी में है, अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, जेनेटिक साइंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़कर यह राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है।
*प्रभावित करते हैं बीमारी के उन्मूलन के प्रयास*
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी, पहला- बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना, दूसरा- व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना और तीसरा- प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाए रखना। सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किए जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी वाहक भी पहचाने जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते, इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं।
*रोगियों की समुचित स्वास्थ्य देखभाल सराहनीय कदम*
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियो और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्य प्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जांच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया गया है। गत वर्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है। मुझे बताया गया है कि मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही है। जनजातीय विद्यार्थियों को भी परामर्श, उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ एवं दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर स्क्रीनिंग की जा रही है। उन्होंने कहा है कि मुझे बताया गया कि पिछले वर्ष विश्व सिकल सेल दिवस पर प्रदेश में “सिकल मित्र” पहल का शुभारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को सहायता प्रदान करने तथा उन्हें शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सार्थक पहलों के लिए मैं प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को बधाई देती हूं। मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे। देश में जनजातीय समुदाय के लोगों के सबसे बड़ी संख्या मध्य प्रदेश में है। मैं आशा करती हूं कि मध्य प्रदेश द्वारा जनजातीय विकास के अनेक प्रतिमान स्थापित किए जाएंगे। इसी आशा के साथ मैं आप सब के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करती हूं।
*इस मिशन में एमपी ने बनाया रिकॉर्ड*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशन में मध्यप्रदेश ने रिकॉर्ड बनाया है। मिशन की सफलता से भविष्य की कई पीढ़ियां सुरक्षित होंगी। विश्व सिकल सेल दिवस 2026 के अवसर पर ओंकारेश्वर में सादगी, शुचिता और संघर्ष की मिसाल महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु की उपस्थिति प्रदेशवासियों को संबल प्रदान कर रही है। राज्य सरकार दृढ़ संकल्प के साथ सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए कार्य कर रही है। सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में राज्य सरकार एक साथ चार मोर्चों पर काम कर रही है। प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें रोग के बारे में परामर्श और इलाज दिया जा रहा है। जेनेटिक काउंसलिंग करते हुए भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए सिकल सेल कार्ड बांटे जा रहे हैं। जन जागरूकता अभियान के लिए 3700 से अधिक सिकल मित्र एनसीसी कैडेट्स की तरह हमारे प्रयासों को गति दे रहे हैं। हम मध्यप्रदेश की धरती पर सिकल सेल एनीमिया को जड़ से खत्म कर अपना संकल्प पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के विकास के साथ मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हुई है। पिछली सरकारों में 55 साल में सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे और अब मध्यप्रदेश में इनकी कुल संख्या 32 हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुआ है।
*स्वास्थ्य को लेकर प्रतिबद्ध है राज्य सरकार*
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनकी जानकारी नहीं होने पर वे अनजाने में हमारी भावी पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ती रहती हैं। राज्य सरकार अनुसूचित जाति और जनजातीय वर्ग के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ पीएम जनमन योजना के माध्यम से कार्य कर रही है। खंडवा में क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर राज्य सरकार विकास के सभी पैमाने पर आगे बढ़ रही है। वीरांगना रानी दुर्गावती और राजा भभूत सिंह जैसे महान नायकों के नाम पर कैबिनेट बैठकें आयोजित की गई हैं। छिंदवाड़ा में बादल भोई और जबलपुर में राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह संग्रहालय का लोकार्पण किया है। सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए भगोरिया को राजकीय उत्सव का दर्जा दिया गया है। कन्या छात्रावासों के नाम भी आदिवासी नायकों के नाम पर रखे गए हैं। जनजातीय भाई-बहनों का कल्याण और उनका समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता है।
*लगातार हो रहे प्रयास*
कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन- 2047 में सबसे अच्छा कार्य किया है। सिकल सेल को जड़ से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षb 2023 में शहडोल से एक मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन को राज्यपाल के प्रयासों ने और गति प्रदान की है। प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में अब तक 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। मध्यप्रदेश सिकल सेल एमीनिया की स्क्रीनिंग के मामले में अग्रणी राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का टारगेट रखा है। अब कुंडली से पहले सिकल सेल स्क्रीनिंग कार्ड का मिलान किया जाने लगा है। इसके लिए प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी सिकल सेल का वाहक न बने।
Read Next


खंडवा 
खंडवा 

खंडवा 
