काउंसलिंग ने जोड़े बिखरे रिश्ते: श्री दादाजी वृद्ध आश्रम के प्रयास से वृद्ध दंपति की परिवार में हुई भावुक वापसी।

खंडवा। परिवार से बिछड़कर श्री दादाजी वृद्ध आश्रम में रह रहे एक वृद्ध दंपति की जिंदगी में फिर खुशियां लौट आईं। आश्रम की काउंसलिंग और सतत संवाद के प्रयासों से दोनों का अपने परिवार से पुनर्मिलन हो गया। यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि श्री दादाजी वृद्ध आश्रम द्वारा संचालित सेवा और समाजहित के कार्यों के तहत आश्रम में रह रहे वृद्ध दंपति को आवश्यक सहयोग और संरक्षण प्रदान किया जा रहा था। इसी दौरान आश्रम की काउंसलर नीलम मैथिल ने परिवारजनों से लगातार संवाद कर आपसी मतभेद दूर करने का प्रयास किया। इस पूरी प्रक्रिया में भारती नरवाडे का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सकारात्मक काउंसलिंग का परिणाम यह रहा कि परिवार के रिश्तों में आई दूरियां खत्म हुईं और वृद्ध दंपति पुनः अपने परिजनों के साथ रहने के लिए घर लौट गए।
सेवा समिति प्रबंधक मुकेश मैथिल ने कहा कि वृद्ध हमारे परिवार की धरोहर और आशीर्वाद हैं। उन्हें कभी बोझ नहीं समझना चाहिए, बल्कि प्रेम, सम्मान और अपनत्व के साथ परिवार में स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “परिवार से बढ़कर कोई आश्रम नहीं और अपनों के साथ से बढ़कर कोई सहारा नहीं।” समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आश्रम की संचालिका अनिता सिंह चौहान ने समाज से भावुक अपील करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में अपने बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें। यदि परिवार में मतभेद हों तो संवाद और काउंसलिंग के माध्यम से उनका समाधान निकालें। उन्होंने कहा, “अपने बुजुर्गों को वृद्धाश्रम नहीं, अपने परिवार में सम्मान और प्रेम के साथ रखें।”
श्री दादाजी वृद्ध आश्रम ने इस अवसर पर समाज से आह्वान किया कि वृद्धों का सम्मान केवल नैतिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान है। परिवार में बुजुर्गों को स्नेह और सम्मान देना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
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