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अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस” पर विशेष* *”सिकल सेल एनीमिया” क्या है, और क्यों होता है* *”सिकल सेल एनीमिया” रोग से कैसे करें बचाव*

खंडवा 18 जून 2026, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.ओ.पी.जुगतावत ने सिकलसेल एनीमिया रोग के बारे मेें बताया कि प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति के रक्त में लाल रक्त कोशिकाऐं होती हैं, जो आकार में गोल नर्म और लचीली होती हैं। यह लाल रक्त कोशिकाएं जब स्वंय के आकार से भी सूक्ष्म धमनियों में से प्रवाह करती है तब वह अंडाकार आकार की हो जाती है। सूक्ष्म धमनियों से बाहर निकलने के बाद कोशिकाओं के लचीलेपन के कारण वे पुनः अपना मूल स्वरुप ले लेती है। लाल रक्त कोशिकाओं का लाल रंग उसमें रहने वाले हीमोग्लोबिन नामक तत्व के कारण होता है। स्वस्थ रक्तकण में हीमोग्लोबिन सामान्य प्रकार का होता है। हीमोग्लोबिन का आकार सामान्य के बदले असामान्य भी देखने को मिलता है। जब लाल रक्त कोशिकाओं में इस प्रकार का बदलाव होता है तब लाल रक्त कोशिकाएं जो सामान्य रुप से आकार में गोल तथा लचीली होती हैं यह गुण परिवर्तित कर अर्ध गोलाकार एवं कड़क हो जाता है जिसे “सिकल सेल” कहा जाता है। यह धमनियों में अवरोध उत्पन्न करती है जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन व खून की कमी होने लगती है इसलिए इसे “सिकल सेल एनीमिया” कहा जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं का यह विकार हमारे अंदर रहने वाले जीन की विकृति के कारण होता है। जब लाल रक्त कोशिकाओं में इस प्रकार का विकार पैदा होता है तब व्यक्ति के शरीर में अलग-अलग प्रकार की शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं जैसे कि हाथ पैरों में दर्द होना, कमर के जोड़ो में दर्द होना, अस्थि रोग, बार बार पीलिया होना, लीवर पर सूजन आना, मूत्राशय में रुकावट या दर्द होना, पित्ताशय में पथरी होना। जब किसी भी व्यक्ति को यह समस्याएँ होने लगे तो उसे रक्त की सिकल सेल एनीमिया के लिए जाँच करवाना आवश्यक होता है।

*सिकल सेल रोग कैसे होता है*
यह रोग अनुवांशिक आधारित है हर व्यक्ति को अपने माता-पिता के माध्यम से एक जीन मिलता है अर्थात् हर व्यक्ति में दो जीन होते हैं एक माता के द्वारा जबकि दूसरा पिता के द्वारा प्राप्त होता है। जीन में सामान्य प्रकार का हीमोग्लोबिन हो सकता है तथा दूसरे में असामान्य प्रकार का हीमोग्लोबिन हो सकता है, अथवा दोनों जीन में असामान्य प्रकार के हीमोग्लोबिन हो सकते हैं। असामान्य प्रकार के हीमोग्लोबिन वाली लाल रक्त कोशिका को सिकल सेल कहा जाता है । इस प्रकार के जीन पाने वाले व्यक्ति भविष्य में अपने बच्चों को वंशानुगत रूप से इसमें से किसी भी प्रकार के जीन दे सकते है जो सामान्यया असामान्य हो सकते हैं ।

*सिकलसेल एनीमिया के प्रकार*
सिकल सेल एनीमिया दो प्रकार का हैं जिसमें पहला सिकल सेल वाहक व्यक्ति रोग के वाहक के रूप में काम करते हैं उनमें सिकल सेल के रोग के लक्षण स्थायी न होकर कभी-कभी दिखाई देते हैं । फिर भी ये व्यक्ति अपने बच्चों को वंशानुगत यह रोग दे सकते हैं । दूसरा वह व्यक्ति होते है जिनमें रोग के लक्षण स्थायी रूप से रहते हैं उनके शरीर का विकास रूक जाता है। ऐसे रोगी अपने बच्चों को वंशानुगत यह रोग देते हैं।
*यह रोग आनुवांशिक कैसे होता है*

माता और पिता में सिकल सेल के गुण या सिकल सेल का रोग नहीं है तो उनके बच्चों को यह रोग नहीं होता है। सामान्य हीमोग्लोबिन रखने वाले माता-पिता के बच्चों को यह रोग नहीं होता है और वंशानुगत बच्चों में सामान्य हीमोग्लोबिन होता हैं। माता या पिता दोनों में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल वाहक होगा तो दूसरा व्यक्ति सामान्य होगा तो 50 प्रतिशत बच्चों को सिकल वाहक होने का और 50 प्रतिशत बच्चे में सामान्य गुण वाले होने की सम्भावना होती है परन्तु किसी भी बच्चे को सिकल रोग नहीं होता है। माता पिता दोनों ही सिकल वाहक होंगे तो उनके 25 प्रतिशत बच्चों को सिकल रोग, 50 प्रतिशत बच्चे सिकल वाहक और मात्र 25 प्रतिशत सामान्य बच्चे होने की सम्भावना रहती है । माता पिता में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल रोग वाला है और दूसरा व्यक्ति सामान्य है तो 100 प्रतिशत यानी की सभी बच्चे सिकल वाहक हो सकते है परन्तु सिकल रोग नहीं । माता पिता दोनों में से एक व्यक्ति सिकल रोग वाला और एक व्यक्ति सिकल वाहक वाला होगा तो उनके 50 प्रतिशत बच्चे सिकल रोग वाले होंगे और 50 प्रतिशत बच्चे सिकल वाहक वाले होंगे। माता पिता दोनों सिकल रोग वाले होंगे तो 100 प्रतिशत यानी की सभी बच्चे सिकल रोग वाले ही जन्म लेंगे ।
सिकल सेल रोग वाले मरीज के लक्षण
जोड़ों में सूजन या दर्द होना, पित्ताशय की पथरी, बार-बार बुखार या जुकाम होना, तिल्ली का बढ़ जाना, लीवर पर सूजन आना, बच्चों का विकास न होना, रोग प्रतिरोधक शक्ति घटने से दूसरी बीमारियों का आसानी से होना इस बीमारी के लक्षण है। रोग का निदान न किया जाये तो जरूरी उपचार न मिलने से बचपन में ही बच्चे की मृत्यु हो सकती है ।

*सिकल सेल रोग से बचाव के लिए क्या कर सकते है*

विवाह से पहले लड़के और लड़की के खून की सिकल सेल के लिए जाँच कराएं।
परिवार में किसी भी सदस्य को सिकल सेल एनीमिया हो तो परिवार के सभी सदस्यों के रक्त की सिकल सेल की जाँच कराएं । स्वयं सिकल सेल रोगी हैं तो डॉक्टर के पास जब दवा लेने जाएं तब डॉक्टर को अपनी बीमारी की सही जानकारी बताएं जिससे जरूरी दवाएँ व उपचार हो सके । यदि आपको बार-बार पीलिया होता है, खून की कमी रहती है, जोड़ों में दर्द होता है या चेहरे पर पीलापन अनुभव करते हैं तो अस्पताल में खून की जाँच करवाएं। सिकल वाहक अथवा सिकल रोग वाले व्यक्ति का विवाह दूसरे सिकल वाहक अथवा सिकल रोग वाले व्यक्ति के साथ हुआ हो और स्त्री गर्भवती हो तो बच्चों में यह रोग होगा या नहीं इस बात की जाँच 10 से 12 सप्ताह के गर्भ में से सैंपल लेकर किया जा सकता है। बच्चें की सिकल रोग के साथ पैदा होने की संभावना है तो गर्भपात करवाया जा सकता है ।
सिकल सेल रोगियों को रखने वाली सावधानियाँ
प्रत्येक सिकल सेल एनीमिया के मरीज को दिन भर में जितना संभव हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए कम से कम 10 से 15 गिलास पानी पिएं। प्रतिदिन एक गोली फॉलिक एसिड 5 मिली ग्राम की जरुर लेनी चाहिये जो एनीमिया को कम करेगी और खून में नई लाल रक्त कोशिका बनाने में मदद करेगी। शराब, धूम्रपान या अन्य नशायुक्त चीजों का सेवन नहीं करना चाहिये। सिकल सेल मरीज को सम्पूर्ण संतुलित खुराक भोजन लेना चाहिए ताकि शरीर में जो विटामिनों की कमी हो वह सब उसे मिल सकें ।
*सिकल सेल रोगी को क्या नहीं करना चाहिये*

ज्यादा गर्मी या धूप में बाहर न निकलें। ज्यादा ऊँचाई वाले पहाड़ों और हिल स्टेशन पर न जाएं। ज्यादा ठंडी में बाहर न निकलें। ज्यादा तकलीफ हो तो घरेलू उपचार न करते हुए अस्पताल में डॉक्टर से सम्पर्क करें ।
*गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष*
गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केन्द्र पर सिकल रोग की जाँच जरुर कराए। जांच में सिकल सेल टेस्ट पॉजिटिव हो तो उनके पति का भी सिकल सेल टेस्ट तत्काल करवाएं। सिकल सेल एनीमिया बच्चे को जन्म देने वाले माता पिता, परिवार के अन्य सदस्य तथा दूर के रिश्तेदारों का सिकल सेल का परीक्षण जरुर करवाएं ।
आलेख
बृजेंद्र शर्मा
PRO खंडवा

Anoop Kumar Khurana

Publisher and Editor Anti corruption and crime update & ACACU DIZITEL

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