कुंदन मालवीय की चुनाव याचिका में एक और आवेदन हाई कोर्ट ने किया खारिज
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने खंडवा से जुड़ी एक चुनाव याचिका में याचिकाकर्ता कुंदन मालवीय को एक बार फिर झटका दिया है। हाई कोर्ट ने उनके द्वारा दायर एक और आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें कुछ दस्तावेजों को न्यायालय के रिकॉर्ड पर लेने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता कुंदन मालवीय ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 7 नियम 14 के तहत आवेदन क्रमांक 25055/2025 दायर किया था। इस आवेदन में उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने खंडवा कलेक्टर कार्यालय से कुछ अभिलेख मंगवाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन वह आवेदन पहले ही निरस्त कर दिया गया। साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी में यह बताया गया कि विधायक श्रीमती तनवे को जारी जाति प्रमाण पत्र से संबंधित कार्यवाही का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि ये दस्तावेज वर्तमान चुनाव याचिका के लिए महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं, इसलिए इन्हें न्यायालय के रिकॉर्ड में शामिल किया जाना चाहिए।
वहीं, विधायक श्रीमती कंचन तनवे की ओर से उनके अधिवक्ता ने इस आवेदन का विरोध किया। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह आवेदन समय-सीमा के बाद दायर किया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता का साक्ष्य 20 अगस्त 2025 को ही समाप्त हो चुका है। इसके अलावा याचिकाकर्ता को 31 जनवरी 2024 से ही इस जानकारी की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उस समय इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया।
अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इतनी पहले से जानकारी होने के बावजूद दस्तावेज समय पर क्यों पेश नहीं किए गए। इसलिए अब इस कमी को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और आवेदन को खारिज किया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 14 के तहत वही दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं, जो वादपत्र के साथ या उसकी सूची में शामिल हों। यदि ऐसा नहीं किया गया है, तो बाद में दस्तावेज केवल न्यायालय की अनुमति से ही रिकॉर्ड पर लिए जा सकते हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ता पहले ही अपना साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका है और अब मामला प्रतिवादी के साक्ष्य के लिए सूचीबद्ध है। जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई है, वे केवल याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए आवेदन, RTI के तहत किया गया आवेदन और एसडीओ द्वारा दिया गया उत्तर हैं। इन दस्तावेजों को न तो प्रतिवादी को जारी किया गया है और न ही उन पर प्रतिवादी के हस्ताक्षर हैं, इसलिए इन्हें जिरह या सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश 7 नियम 14 सीपीसी के तहत दायर आवेदन क्रमांक 25055/2025 को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि अब इस मामले में प्रतिवादी संख्या 1, विधायक श्रीमती कंचन तनवे के साक्ष्य के लिए सुनवाई 18 मार्च 2026 को की जाएगी।
(यह आदेश चुनाव याचिकाओं में समय पर साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनिवार्यता को स्पष्ट करता है।)







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