पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर बढ़ते उग्रवाद का खतरा, जिनेवा में विशेषज्ञों ने जताई चिंता

जिनेवा। पाकिस्तान में बढ़ती कट्टरता, उग्रवादी विचारधाराओं के प्रसार और राजनीतिक-आर्थिक अस्थिरता के बीच परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है। यह मुद्दा स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और पैनल चर्चा के दौरान प्रमुखता से सामने आया। सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें नियमित सत्र के दौरान सहायक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था।
रेने नाबा की पुस्तक का हुआ विमोचन
कार्यक्रम में फ्रांसीसी पत्रकार एवं भू-राजनीतिक विश्लेषक रेने नाबा की पुस्तक “एशिया का परमाणुकरण: परमाणुकरण से एशिया का उदय” का आधिकारिक विमोचन किया गया। नाबा एएफपी समाचार एजेंसी के अरब-मुस्लिम डेस्क के पूर्व प्रमुख रहे हैं। पुस्तक में एशिया की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत के साथ परमाणु अप्रसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सैन्य इस्तेमाल और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़े जोखिमों का विश्लेषण किया गया है।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को लेकर चिंता
पैनल चर्चा में शामिल सुरक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों ने पाकिस्तान में बढ़ती सार्वजनिक कट्टरता और उग्रवादी विचारधाराओं को परमाणु सुरक्षा के संदर्भ में एक संभावित आंतरिक जोखिम बताया। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियों को भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती के रूप में चर्चा में शामिल किया गया।
विश्लेषकों के अनुसार राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता गंभीर होने की स्थिति में सरकारी संस्थाओं और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। चिंता यह भी जताई गई कि यदि सुरक्षा संस्थानों से जुड़े कर्मियों के बीच चरमपंथी विचारधारा प्रभाव बनाती है तो परमाणु कमान एवं नियंत्रण व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
भारत-पाकिस्तान तनाव भी बड़ा सुरक्षा मुद्दा
रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच किसी पारंपरिक सैन्य संघर्ष के बढ़ने की स्थिति दक्षिण एशिया और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता पैदा कर सकती है।
हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण की निगरानी में उसका परमाणु कार्यक्रम सुरक्षित है। दूसरी ओर, बाहरी विश्लेषक संकट की परिस्थितियों में कमान एवं नियंत्रण व्यवस्था से जुड़े संभावित जोखिमों पर सवाल उठाते रहे हैं।
ए.क्यू. खान नेटवर्क का भी जिक्र
विश्लेषण में ए.क्यू. खान परमाणु प्रसार नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इस प्रकरण ने अतीत में परमाणु तकनीक के प्रसार और संवेदनशील तकनीक तक अनधिकृत पहुंच की आशंकाओं को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को प्रभावित किया था।
AI और साइबर युद्ध को भी उभरता खतरा बताया
जिनेवा में हुई चर्चा का निष्कर्ष रहा कि वैश्विक शक्ति के रूप में एशिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन परमाणु हथियार संपन्न देशों की आंतरिक अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के सामने चुनौती बनी हुई है।
पैनल ने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पारंपरिक परमाणु खतरों के साथ-साथ AI के सैन्य इस्तेमाल, साइबर युद्ध और आतंकवादी संगठनों द्वारा परमाणु सामग्री हासिल करने की संभावित कोशिशों जैसे उभरते जोखिमों से निपटने के लिए व्यापक और जिम्मेदार वैश्विक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विश्लेषण में निष्कर्ष निकाला गया कि पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार की सुरक्षा केवल आधुनिक तकनीकी उपायों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए राजनीतिक स्थिरता, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और समावेशी सामाजिक वातावरण भी महत्वपूर्ण हैं।
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