खंडवा-ओंकारेश्वर में सख्ती: कलेक्टर की कार्रवाई से भूमाफियाओं में हड़कंप, करोड़ों की भूमि खाली
ओंकारेश्वर। पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर से महज़ 3 किलोमीटर दूर ग्राम डुकिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब, असहाय और निर्धन परिवारों के लिए आवंटित शासकीय भूमि पर कथित रूप से वर्षों से कब्जा जमाए बैठे भू-माफियाओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि रसूखदार सफेदपोशों के संरक्षण में एक बड़े भू-माफिया द्वारा इस सरकारी जमीन पर गेहूं, चना, सोयाबीन, कपास सहित अन्य फसलें बोई जाती रही हैं, जबकि यह भूमि गरीबों के आवास निर्माण के लिए चिन्हित है।
एक ओर प्रशासन ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर लगातार प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ/कुंभ मेले को देखते हुए प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं की बड़ी चुनौती है, ऐसे में भूमि प्रबंधन और अतिक्रमण हटाना प्राथमिकता माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इंदौर–इच्छापुर हाईवे से ओंकारेश्वर तक लगने वाली ग्राम पंचायतें—मोरटक्का माफी, मोरघड़ी, थापना, कोठी और भोगवा क्षेत्र—में करोड़ों रुपए मूल्य की शासकीय भूमि खाली पड़ी है। इन जमीनों पर भी भूमाफियाओं की नजर होने और कई स्थानों पर कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मामले की शिकायतें सामने आने के बाद कलेक्टर द्वारा सख्त तेवर अपनाते हुए स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दिए जाने की चर्चा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राजस्व विभाग और नगर परिषद इन कथित बड़े मगरमच्छ भू-माफियाओं पर ठोस कार्रवाई कर पाते हैं या फिर मामला कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच यह मुद्दा प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है—क्या गरीबों के हक की जमीन वापस दिलाई जाएगी और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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