अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में पीछे न रहें, महिलाओं की सुरक्षा और साइबर अपराधों पर सख्त हुए सीएम मोहन यादव

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गुरुवार को गृह विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहे और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने जैसी कानूनी कार्यवाहियों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर आरक्षक स्तर तक सभी को पूरी सक्रियता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस बल के आधुनिकीकरण और संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे में पुलिस को नई तकनीक और आधुनिक संसाधनों से सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने अपराधों की जांच करने वाले विवेचना अधिकारियों को अन्वेषण भत्ता देने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार करने की बात कही। इसके लिए अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध स्थल पर त्वरित पहुंच, सुरक्षा व्यवस्था, साक्ष्य संकलन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, गवाहों और पीड़ितों के परिवहन तथा न्यायालयीन प्रक्रियाओं से जुड़े खर्चों को देखते हुए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा को लेकर भी अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास छेड़छाड़ और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। पुलिस ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखे और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे।
समीक्षा बैठक में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को आईटी कंसल्टेंट और साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया आधारित अपराधों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दुरुपयोग से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना होगा। राज्य साइबर सेल द्वारा विशेषज्ञों की सेवाएं लेने और साइबर अपराधों के प्रभावी विश्लेषण के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
बैठक में वर्ष 2028 में होने वाले Simhastha 2028 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन के लिए भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था पहले से तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि Ujjain में विकसित किए जाने वाले कंट्रोल रूम और अन्य ढांचे अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी अधोसंरचना के रूप में तैयार किए जाएं, जिससे भविष्य में भी उनका लाभ मिल सके। उन्होंने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना पर काम करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में भोजशाला और बसंत पंचमी जैसे संवेदनशील अवसरों पर पुलिस बल द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों की सजगता के कारण प्रदेश में शांति और व्यवस्था बनी रही, जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है।
बैठक में पुलिस विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की भी प्रशंसा की गई। मुख्यमंत्री ने राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के प्रयासों, आपदा मित्रों के प्रशिक्षण, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के अभियानों, अग्निशमन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, एयर एम्बुलेंस संचालन में सहयोग और सैनिक कल्याण संबंधी पहलों को सराहनीय बताया। उन्होंने खुले स्थानों पर मांस विक्रय पर प्रतिबंध और तेज ध्वनि वाले स्पीकरों के उपयोग पर नियंत्रण संबंधी निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।
इसके अलावा बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस चयन एवं भर्ती बोर्ड के गठन, जिला स्तर पर सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट संचालित करने, काउंटर टेररिस्ट ग्रुप को मजबूत बनाने, एटीएस, एसटीएफ और हॉक फोर्स जैसी विशेष इकाइयों के प्रशिक्षण को और बेहतर बनाने तथा वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष भत्ता देने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बुजुर्गों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित “सेफगार्ड एमपी” जैसी नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन पहलों से मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
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