भारत-ईरान संबंधों में नए दौर की दस्तक, BRICS और चाबहार से बढ़ेंगे सहयोग के अवसर

नई दिल्ली | भारत-ईरान संबंध | BRICS Summit 2026: भारत और ईरान के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय कूटनीतिक सक्रियता देखने को मिली है। 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन को भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
BRICS के जरिए भारत-ईरान सहयोग को मिल सकती है नई दिशा
ईरान के BRICS में शामिल होने के बाद भारत और ईरान के बीच बहुपक्षीय सहयोग का एक नया आयाम सामने आया है। BRICS के मंच पर व्यापार, ऊर्जा, विकास, तकनीक और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाएं बढ़ी हैं।
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया है। ऐसे में भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को विशेष महत्व मिला है।
चाबहार पोर्ट बना भारत-ईरान साझेदारी की अहम कड़ी
भारत-ईरान संबंधों में चाबहार बंदरगाह लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारत और ईरान ने चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन को लेकर दीर्घकालिक समझौता किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की कनेक्टिविटी और व्यापारिक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है।
चाबहार के माध्यम से भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच भी चाबहार की ट्रांजिट और परिवहन क्षमता को विकसित करने पर चर्चा हो चुकी है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी हुई चर्चा
बिश्केक में हुई बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। भारत ने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान तथा समुद्री मार्गों और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
ऐतिहासिक रिश्तों से रणनीतिक साझेदारी तक
भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और व्यापारिक संबंधों की लंबी परंपरा रही है। अब इन संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, शिक्षा, अनुसंधान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
भारत के लिए ईरान की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से मध्य एशिया और यूरेशिया के बाजारों तक कनेक्टिविटी के विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
भारत-ईरान संबंधों का अगला चरण
भारत और ईरान के बीच आगामी सहयोग में BRICS, चाबहार पोर्ट, व्यापार, ऊर्जा, क्षेत्रीय संपर्क, शिक्षा और तकनीक प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
31 अगस्त 2026 की बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के बीच हुई बातचीत ने भारत-ईरान संबंधों में लगातार जारी उच्चस्तरीय संवाद को एक बार फिर सामने रखा है।
लेखक: प्रोफेसर अज़रा आबिदी, समाजशास्त्र विभाग की प्रमुख, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
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