चेक बाउंस पर अदालत का सख्त संदेश: भुगतान में लापरवाही पड़ सकती है भारी*
आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने की दिशा में खंडवा न्यायालय का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री सुयश परनाम ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत एक चेक बाउंस प्रकरण में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 माह के सश्रम कारावास तथा ₹98,791 प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया है।
प्रकरण में आरोपी द्वारा ₹79,000 का चेक जारी किया गया था, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “Funds Insufficient” के कारण अनादृत हो गया। विधिक नोटिस मिलने के बाद भी निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते मामला न्यायालय पहुंचा। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
साथी न्यायाधीश श्री सुयश परनाम ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति चेक जारी करता है, तो उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि होना आवश्यक है। चेक बाउंस होने पर केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई, कारावास और अतिरिक्त प्रतिकर का सामना भी करना पड़ सकता है।
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