UCC बिल के विरोध से पहले खंडवा के मजलिस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप, पार्टी ने सरकार पर साधा निशाना

खंडवा/भोपाल। मध्य प्रदेश में UCC बिल के विरोध को लेकर भोपाल विधानसभा के घेराव से पहले खंडवा के मजलिस कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर आधी रात को उनके घरों से हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। मजलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया गया है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए भोपाल जाने का था कार्यक्रम
मजलिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पार्टी के कार्यकर्ता UCC बिल के विरोध में भोपाल विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव करने के लिए जाने वाले थे। आरोप है कि इससे पहले ही खंडवा में कुछ कार्यकर्ताओं को रात के समय उनके घरों से पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
पार्टी ने इसे सरकार द्वारा विरोध की आवाज को दबाने की कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों पर पुलिस अथवा प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।
मजलिस ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संविधान प्रत्येक नागरिक और संगठन को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। पार्टी का आरोप है कि UCC के विरोध में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले की गई कार्रवाई इसी अधिकार को प्रभावित करने वाली है।
मजलिस ने पुलिस प्रशासन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कार्यकर्ताओं को आधी रात में हिरासत में लिया गया। पार्टी ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसकी निंदा की है।
सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की बात
मजलिस ने अपने बयान में कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से संगठन पीछे नहीं हटेगा और UCC सहित अन्य मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहेगा। पार्टी ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए विरोध को और तेज करने की बात कही है।
नोट: खबर मजलिस की ओर से 22 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में किए गए दावों पर आधारित है। कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियों और आरोपों पर पुलिस-प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
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