पंधाना की बोरगांव बुजुर्ग,करोड़ों की पंचायत, फिर भी बूंद-बूंद को तरसे लोग: गहराया जल संकट.. कई किलोमीटर दूर से भीषण गर्मी में पानी ला रही महिलाएं एवं बच्चे…
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के बोरगांव बुजुर्ग गांव में इन दिनों पानी की गंभीर किल्लत ने ग्रामीणों का जीवन मुश्किल कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच यहां की महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे कई किलोमीटर दूर स्थित कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि जो पानी मिल रहा है, वह भी गंदा और पीने योग्य नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार, सुबह से ही पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती है। महिलाएं सिर पर मटके रखकर लंबी दूरी तय करती हैं, वहीं बच्चे भी इस कठिनाई में बराबर का हाथ बंटा रहे हैं। गर्मी और प्यास के बीच यह संघर्ष अब रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।
हैरानी की बात यह है कि बोरगांव बुजुर्ग ग्राम पंचायत को खंडवा जिले की सबसे समृद्ध पंचायतों में गिना जाता है। पंचायत के पास सालाना करोड़ों रुपए का राजस्व आता है, लेकिन इसके बावजूद मूलभूत सुविधा — पीने के पानी — की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरपंच और पंचायत सचिव इस गंभीर समस्या को लेकर उदासीन हैं। लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की बजाय व्यक्तिगत छवि निर्माण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
यह स्थिति तब और सवाल खड़े करती है, जब खंडवा जिले का नाम “जल जीवन मिशन”, “जल गंगा संवर्धन” और “नल जल योजना” जैसे अभियानों में देशभर में सम्मान के साथ लिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत बोरगांव बुजुर्ग जैसे गांवों में इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके और इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके।
फिलहाल, सवाल यही है कि जब संसाधन मौजूद हैं, तो फिर बोरगांव बुजुर्ग के लोगों को पानी के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?
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