सरसों तेल महंगा होने के आसार, MSP से ऊपर बिक रही फसल से बढ़ी चिंता

ग्वालियर: मध्य प्रदेश में इस साल सरसों की कम पैदावार का असर अब आम लोगों की रसोई पर पड़ने वाला है। मंडियों में सरसों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर पहुंच गई हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में सरसों तेल के दाम तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र, जो प्रदेश का प्रमुख सरसों उत्पादक इलाका माना जाता है, इस बार मौसम की मार से बुरी तरह प्रभावित हुआ। लंबे समय तक सक्रिय मानसून, पाले का असर और कटाई के दौरान बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया। शुरुआती आकलनों के अनुसार, इस साल उत्पादन में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
सरकार ने सरसों का MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, लेकिन स्थानीय मंडियों में किसानों को 6800 से 7000 रुपये तक दाम मिल रहे हैं। यानी MSP से 600 से 800 रुपये अधिक कीमत मिल रही है। इससे किसानों को तो फायदा हुआ है, लेकिन बाजार में तेल की कीमतें बढ़ना तय माना जा रहा है।
तेल के दाम 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की आशंका
वर्तमान में सरसों तेल की खुदरा कीमत 150 से 160 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है। व्यापारियों के मुताबिक, कच्चे माल की कमी और बढ़ती मांग के कारण यह कीमत जल्द ही 170 रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।
मिलों पर संकट, उत्पादन ठप होने का खतरा
सरसों की घटती आवक का असर तेल उद्योग पर भी दिख रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की कई मस्टर्ड ऑयल मिलें स्थानीय मंडियों पर निर्भर हैं, लेकिन इस बार पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिलने से कई इकाइयों के सामने संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया है।
मुरैना क्षेत्र में पहले ही कई मिलें बंद हो चुकी हैं, और यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो बाकी इकाइयों पर भी असर पड़ सकता है। इससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उत्पादन और लगातार बनी हुई मांग के कारण आने वाले समय में सरसों तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में जहां किसानों के लिए यह सीजन फायदेमंद साबित हो रहा है, वहीं आम उपभोक्ताओं को महंगाई का बोझ उठाना पड़ेगा।
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