लोकसभा में उठी मांग: उच्च न्यायालयों में हिंदी अनिवार्य करें।

खंडवा। देश में न्याय तक पहुँच को आम नागरिकों के लिए आसान बनाने की दिशा में भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने लोकसभा में जोरदार प्रस्ताव पेश किया। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मध्यप्रदेश और अन्य हिंदी भाषी राज्यों के उच्च न्यायालयों में कार्यवाही और आदेशों की भाषा हिंदी करने की मांग उठाई।
सांसद पाटिल ने बताया कि वर्तमान में अधिकांश उच्च और जिला न्यायालय अंग्रेजी में कार्यरत हैं। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र और गरीब नागरिक, जो अंग्रेजी से परिचित नहीं हैं, वकीलों पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं और अपने ही मामलों की स्थिति समझने में असमर्थ रहते हैं। इस वजह से आम लोग न्याय प्रणाली से कटे हुए महसूस करते हैं। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया की सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने लोकसभा में संविधान के अनुच्छेद 348(2) और राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा कि उच्च न्यायालयों में हिंदी या क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग को अनिवार्य करना न्यायिक प्रक्रिया को जनसुलभ और पारदर्शी बनाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि हिंदी को न्यायालयीन कार्यवाही और आदेशों की प्रमुख भाषा के रूप में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
इस कदम को सांसद ने समान न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने और हिंदी भाषी राज्यों के नागरिकों के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए आवश्यक बताया। लोकसभा में इस प्रस्ताव के माध्यम से राजभाषा हिंदी के प्रयोग और न्याय व्यवस्था में आम जनता की भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
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