खंडवा विधानसभा चुनाव याचिका: हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, RTI दस्तावेज साक्ष्य मानने से इनकार, अब स्कूलों के हेडमास्टर होंगे गवाह

17 अप्रैल 2026
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में खंडवा विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर दायर चुनाव याचिका में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह याचिका खंडवा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी कुंदन मालवीय ने भाजपा विधायक कंचन तनवे के खिलाफ दायर की है।

क्या है मामला
याचिकाकर्ता कुंदन मालवीय ने आरोप लगाया है कि विधायक कंचन तनवे का जाति प्रमाण पत्र नियमों के अनुसार नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी जाति प्रमाण पत्र में पिता का नाम होना चाहिए, जबकि संबंधित प्रमाण पत्र में पति का नाम दर्ज है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से चुनाव को शून्य घोषित करने की मांग की है।
सुनवाई में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान डिफेंस विटनेस (बचाव पक्ष के गवाह) की जिरह पूरी कर ली गई। इसी बीच याचिकाकर्ता (कुंदन मालवीय ) की ओर से कुछ दस्तावेज अदालत में पेश किए गए और उन्हें साक्ष्य के रूप में दर्ज करने का अनुरोध किया गया।लेकिन हाईकोर्ट ने इन दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने क्यों किया इनकार
अदालत ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेज RTI (सूचना के अधिकार) के तहत सहायक लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी प्रमाणित प्रतियां हैं।
कोर्ट के अनुसार:
ये दस्तावेज प्राथमिक साक्ष्य (Primary Evidence) नहीं हैं
इन्हें द्वितीयक साक्ष्य (Secondary Evidence) के रूप में स्वीकार करने के लिए
न कोई लिखित आवेदन दिया गया
न ही मौखिक अनुरोध किया गया
इसी कारण कोर्ट ने इन्हें साक्ष्य के रूप में मानने से इंकार कर दिया।
किन दस्तावेजों को नहीं माना गया
कोर्ट ने:
29 नवंबर 2007 को SDO द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र
कंचन तनवे का जिला पंचायत चुनाव का नामांकन पत्र
इन दोनों को एग्जिबिट (साक्ष्य) के रूप में चिन्हित नहीं किया और उन्हें पढ़ने से भी इनकार कर दिया।
अब आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को गवाह के रूप में तलब करने के निर्देश दिए हैं:
प्राइमरी स्कूल पालसूद माल
मिडिल स्कूल खैगांव
बताया गया है कि विधायक कंचन तनवे ने इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की थी। इन हेडमास्टर्स को 6 और 7 मई 2026 को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए समन जारी किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 मई 2026 को तय की गई है।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ
जानकारी के अनुसार, जब कंचन तनवे जिला पंचायत चुनाव लड़ रही थीं, तब रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें नोटिस दिया था कि उनका जाति प्रमाण पत्र सही नहीं है।
इसके बाद:
उन्होंने एक शपथ पत्र (Affidavit) दिया
समय की कमी का हवाला दिया
शपथ पत्र स्वीकार कर लिया गया और चुनाव प्रक्रिया जारी रही
बाद में वह जिला पंचायत अध्यक्ष भी बनीं। पिता की जगह पति का नाम बना विवाद का कारण
आम तौर पर:
जाति प्रमाण पत्र और पैन कार्ड में पिता का नाम दर्ज होता है
लेकिन इस मामले में पति का नाम होने को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
इसी मुद्दे को लेकर:
कुंदन मालवीय ने पहले चुनाव आयोग में शिकायत की
इसके बाद जनवरी 2024 में हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की
जिसमें चुनाव को निरस्त करने की मांग की गई है।
मामले पर सभी की नजर
यह मामला खंडवा की राजनीति से जुड़ा होने के कारण काफी अहम माना जा रहा है।
अब सबकी नजर 6 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां नए गवाहों के बयान से मामले में और स्पष्टता आ सकती है।
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