खंडवा: केस दर्ज होने के बाद भी नहीं थमा अतिक्रमण, वन भूमि पर फिर जुटी भीड़, कर्मचारियों में दहशत
खंडवा।
जिले के पिपलोद थाना क्षेत्र अंतर्गत गुड़ी फॉरेस्ट सर्कल की बीट आमाखुजरी-भिलाईखेड़ा में वन भूमि पर अतिक्रमण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में इसी क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने पहुंची वन विभाग की टीम के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसके बाद नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया जा चुका है।
दर्ज प्रकरण में फरियादी वनपाल अंतरसिंह पिता अजबसिंह बघेल, निवासी पुनासा (हाल वन परिक्षेत्र गुड़ी) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कक्ष क्रमांक 749 में अतिक्रमण रोकने के दौरान वन अमले के साथ झूमा-झपटी, मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डाली गई। इस मामले में रमेश पिता खेमला भिलाला, इंदर सिंह एवं सुरसिंह पिता कालूसिंह, भुवानसिंह पिता इंदरसिंह, बुचा एवं गंगाराम पिता रूपालसिंह, गणपत पिता रूखड़िया, सूरज पिता मोवासिंह, रामसिंह की पत्नी, गोरेलाल की पत्नी सहित अन्य लोगों पर अपराध दर्ज किया गया है। सभी आरोपी आमाखुजरी-भिलाईखेड़ा क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। वहीं रामदास पिता शानू कोरकू, निवासी माखुजरी भिलाईखेड़ा का नाम भी प्रकरण में शामिल है।
कार्रवाई के बाद भी जारी अतिक्रमण
हैरानी की बात यह है कि मामला दर्ज होने के बावजूद अतिक्रमणकारियों के हौसले कम नहीं हुए हैं। ताजा स्थिति में उसी वन भूमि पर एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार अतिक्रमण के लिए बैलगाड़ियों और मजदूरों को भी मौके पर लाया गया है और तेजी से जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
वन संपदा को नुकसान
वन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार जिस क्षेत्र में अतिक्रमण किया जा रहा है, वहां विभाग द्वारा लगाए गए बबूल के पौधों को भी काट दिया गया है। यह पौधे वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए थे, जिन्हें अब नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
मैदानी अमले में डर का माहौल
लगातार हो रही घटनाओं के चलते वन विभाग के जमीनी स्तर के कर्मचारियों में भय का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जान जोखिम में डालकर मौके पर जाना पड़ता है और कई बार इसी क्षेत्र में वन अमले पर जानलेवा हमले तक हो चुके हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि अपराध दर्ज होने के बाद भी जारी इस अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी और क्या वन भूमि को बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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