खंडवा : यहां गलती से भी मुंह से निकली गाली… और फिर जो होता है वो हैरान कर देगा!
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव आज एक ऐसी सकारात्मक पहल के कारण पहचान बना रहा है, जो पूरे समाज को नई दिशा देने का काम कर रही है। यहां ग्रामीणों ने मिलकर अपने गांव को “गाली-मुक्त गांव” बनाने का संकल्प लिया और उसे सख्ती से लागू भी किया।
गांव में लंबे समय से गाली-गलौज की आदत आम होती जा रही थी, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा था। इसे लेकर ग्राम सभा में गंभीर चर्चा हुई और सभी ने एकमत होकर फैसला लिया कि अब गांव में अभद्र भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके तहत यह नियम बनाया गया कि कोई भी व्यक्ति यदि गाली देता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना या सामाजिक दंड की कार्रवाई की जाएगी।
इस निर्णय के पीछे केवल नियम लागू करना ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और आने वाली पीढ़ी को अच्छे संस्कार देना मुख्य लक्ष्य था। ग्रामीणों ने इसे केवल कानून नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया।
इस पहल को सफल बनाने के लिए गांव में आपसी निगरानी और समझाइश की व्यवस्था भी की गई है। शुरुआत में लोगों को समझाया गया, जागरूक किया गया और धीरे-धीरे सभी ने इस बदलाव को अपनाना शुरू कर दिया।
आज बोरसर गांव का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। जहां पहले गाली-गलौज आम थी, वहीं अब लोग एक-दूसरे से सम्मानपूर्वक बात करते हैं। बच्चों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है, जो इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।
बोरसर की यह पहल हमें यह सिखाती है कि बदलाव किसी बड़े संसाधन या सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि सामूहिक सोच और मजबूत संकल्प से आता है। यदि समाज ठान ले, तो छोटी-छोटी बुराइयों को खत्म कर एक बेहतर और संस्कारित वातावरण बनाया जा सकता है।
आज जरूरत है कि ऐसे प्रयासों को अन्य गांव और शहर भी अपनाएं, ताकि समाज में संवाद की भाषा बदल सके और सम्मान की संस्कृति मजबूत हो सके।
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