खंडवा : भूख से बिलखते बच्चों की पुकार, बस स्टैंड पर दिनभर तड़पता रहा परिवार… शाम को जागी इंसानियत
खंडवा शहर के मुख्य बस स्टैंड पर सोमवार को एक बेहद मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। बिहार के मोतिहारी निवासी प्रमोद अपनी पत्नी चंदा और तीन मासूम बच्चों के साथ गंभीर परिस्थितियों में खंडवा पहुंचे थे, लेकिन उनके पास न खाने को कुछ था और न ही आगे जाने का कोई साधन।
दिनभर मदद को तरसता रहा परिवार
सुबह से लेकर शाम तक यह परिवार बस स्टैंड पर ही बैठा रहा। भूख-प्यास से बिलखते बच्चों को देख माता-पिता राहगीरों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन भीड़ भरे इस इलाके में उनकी पीड़ा अनसुनी ही रह गई। बच्चों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और माता-पिता पूरी तरह बेबस नजर आ रहे थे।
शाम को सामने आए समाजसेवी
शाम होते-होते इंसानियत ने करवट ली। बस स्टैंड पर लंबे समय से कुली और समाज सेवा कर रहे मुख्तियार मनिहार की नजर इस परिवार पर पड़ी। उन्होंने तुरंत समाजसेवियों को सूचना दी, जिसके बाद नारायण बाहेती, सुनील जैन, गणेश भावसार और कपिल शर्मा मौके पर पहुंचे।
भूखे बच्चों को अपने हाथों से खिलाया खाना
समाजसेवियों ने परिवार को भोजन उपलब्ध कराया और बच्चों को अपने हाथों से बैठाकर खाना खिलाया। लंबे समय से भूखे बच्चों के चेहरों पर आई राहत देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
वन स्टॉप सेंटर टीम ने की काउंसलिंग
मामले की जानकारी मिलने पर वन स्टॉप शासकीय टीम भी मौके पर पहुंची और परिवार की काउंसलिंग की। बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का सुझाव दिया गया, लेकिन माता-पिता ने साथ रहने की इच्छा जताई।
झिरनिया के लिए किया रवाना
मंगलवार सुबह समाजसेवियों ने परिवार को नाश्ता और फल उपलब्ध कराए और उनकी इच्छा के अनुसार भाटिया बस के माध्यम से झिरनिया के लिए रवाना किया। विदा होते समय परिवार की आंखों में राहत और जुबां पर सिर्फ एक शब्द था—धन्यवाद।
इंसानियत की मिसाल बनी घटना
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भले ही भीड़ में संवेदनाएं कम दिखाई दें, लेकिन जब इंसानियत जागती है तो किसी के लिए फरिश्ता बन जाती है।
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